यूं तो भारत में ऐसे बहुत से ऐतिहासिक स्थान है जहां घूमने का लुत्फ भारतीयों के साथ साथ विदेशी भी उठाते हैं। दिल्ली के कुतुब मीनार से लेकर हैदराबाद के चार मिनार तक ऐसी कई जगह हैं जहां टूरिस्टों का ताता लगा रहता है। लेकिन इन ऐतिहासिक स्थानों में कुछ ऐसे भी हैं जहां जाने के नाम से ही डर का आभास होने लगता है। इन स्थानों पर जरा सी चूक मृत्यु का कारण बन सकती है। हम बात कर रहे हैं भारत के सबसे खतरनाक किले के बारे में……………………………….
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आज हम आपको महाराष्ट्र के माथेरान और पनवेल के बीच स्थित प्रभलगढ़ किले के बारे में बता रहे हैं, जो कलावंती किले के नाम से मशहूर है। 2300 फीट ऊंची खड़ी पहाड़ी पर बने इस किले को भारत के खतरनाक किलों में गिना जाता है।
इस किले के बारे में बताया जाता है कि कठिन रास्ता होने के कारण यहां बेहद कम लोग आते हैं और जो आता है वह सन सेट(सूर्यास्त) के पहले लौट जाता है। दरअसल, खड़ी चढ़ाई होने के कारण आदमी यहां लंबे समय तक नहीं टिक पाता है। साथ ही बिजली, पानी से लेकर यहां कोई भी व्यवस्था नहीं रहती। शाम होते ही मीलों दूर तक सन्नाटा फ़ैल जाता है।
इस किले पर चढ़ने के लिए चट्टानों को काटकर सीढियां बनाई गई हैं। इन सीढ़ियों पर ना तो रस्सियां है और ना ही कोई रेलिंग। बताया जाता है कि चढ़ाई के समय जरा सी भी चूक हुई या पैर फिसला तो आदमी 2300 फीट नीचे खाई में गिरता है। इस किले से गिरने पर आज तक कई लोगों की मौत भी हो चुकी है।
इस किले का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज के राज में बदला गया। पहले इस किले को मुरंजन किला कहा जाता था। बताया जाता है कि शिवाजी ने रानी कलावंती के नाम पर इस किले को नाम दिया।
कलावंती दुर्ग के किले से चंदेरी, माथेरान, करनाल, इर्शल किले भी नज़र आते हैं। वहीं मुंबई शहर का कुछ इलाका भी इस किले से देखा जा सकता है। अक्टूबर से मई तक इस किले पर चढ़ाई की जा सकती है। बारिश के दिनों यहां चढ़ाई बेहद खतरनाक हो जाती है।


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